What is the importance of Confidence in hindi .... बिश्वास का क्या महत्व होता है ?
आपका दिन मंगलमय हो 🙏🙏🙏
कहा गया है की मनुष्य के सफलता के पीछे बिश्वास का सबसे बड़ा योगदान होता है ।
यह सही भी है क्योंकि हमारे आसपास ही कई ऐसे सफल लोगों का उदाहरण मिल जाएंगे जिन्होंने अपने विश्वास और दृढ़ संकल्प के आधार पर सफलता के कदम चुमे है ।
यहाँ एक बच्चा ,पिंकू के बारे में मै आपको बताने जा रहा हुँ ,जिसने अपने विश्वास की शक्ति से अपनी कमजोरी ,असफलताओ को दुर किआ ।
पिंकू के जीवन की कहानी कुछ यूँ है , स्कूल की पढाई के दौरान पिंकू अपने परिवार के साथ एक छोटे से सहर में रहता था ।पढाई लिखाई में उसका मन नहीं लगता था ।अपनी कक्षा में वो हमेशा फिसड्डी (बदमाश ) रहता था । मुश्किल से किसी तरह पास हो कर अगली कक्षा में पहुँचता था । स्कूल के बच्चो से लेकर मोहल्ले तक लोग पिंकू का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे । पिंकू की पढाई में कमजोरी के वजह से उसके माता पिता भी बहुत दुःखी रहते थे । पढाई में पिछड़ने का दुःख पिंकू को भी होता था ,परन्तु कोशिस करने पर भी पढाई में उसका मन नहीं लगता था । हर तरफ से उपेक्षा और तिरस्कार से दुःखी होकर अंततः पिंकू ने पढाई छोड़ने का मन बना लिया ।अभी वह दसबी कक्षा में था । उसकी पढाई की जो स्थिति थी ,उससे Board की परीक्षा में उसे पास करने की उम्मीद ना के बराबर थी । अपने जीवन से निराश पिंकू एक दिन जब स्कूल से लौट रहा था तब रास्ते में एक जगह रामायण की कथा हो रही थी । उस समय ओजस्वी स्वर में कथाकार लंकाकाण्ड की ब्याख्या कर रहे थे । तभी कथाकार के ओजस्वी स्वर से बुरे खयालो में खोए हुए पिंकू की तन्द्रा भंग हुई और वह सम्मोहित होकर कथा स्थल की ओर चल पड़ा । कथा स्थल पर पहुँच कर वो जगह बनाते हुए आगे की लाइन में बैठ गया ।
पिंकू को देखकर कथाकार मुस्कुराए और अपने कथा को जारी रखा । पिंकू एकाग्रता से कथा के एक एक शब्द को सुन रहा था ।इस समय कथाकार कह रहे थे ,समस्या बड़ी गंभीर थी ,सागर तट पर भगबान राम की सेना की सभी योद्धा लक्ष्मण , हनुमान , सुग्रीब आदि गंभीर सोच में दुबे हुए थे ।
जटायु से यह तो पता चल गया था कि रावण सीता को लेकर दक्षिण दिशा में उफ़नते समुद्र के पार स्थित अपने राज्य लंका में गया है , परन्तु इस बिशाल समुद्र को लांघकर लंका जाएगा कौन ? समस्या बिकट थी । तभी वहां की मौनता, सुग्रीब के आवाज़ से भंग
हुई । सुग्रीब ने प्रभु राम से कहा की , हमारे बीच एक दिव्य शक्ति है ,जो समुद्र लाँघ कर लंका जा सकती है । तभी भगबान राम की जिज्ञासा को शांत करने के लिए सुग्रीब ने महाबली हनुमान की और देखा । सुग्रीब जी के संकेत से हनुमान जी सकपका गए । हनुमान की असमंजसता को भाँपते हुए सुग्रीब ने कहा - "है पवनपुत्र सम्भबतः आपको अपनी शक्ति का ज्ञान नहीं है ।
बचपन में आपने सूर्य को एक फल समझते हुए एक छलांग में उसे सैकड़ो कोस दूर जाकर निगल लिया था ,तो फिर लंका की दुरी ही क्या है ?
जरूरत है तो सिर्फ आपको अपने बिश्वास को जगाने की । आप जब अपने बिस्वास की जगा लेंगे और मन से ठान लेंगे तो शक्ति आपमें स्वतः आजाएगी । सुग्रीब जी की बात सुनकर एक तरफ जहाँ हनुमान जी को आश्चर्य हुआ, वहीं उनका बिश्वास भि जाग गया और वो समुद्र लाँघने को तैयार हो गए । अगले ही दिन उन्होंने पूर्ण बिश्वास के साथ समुद्र लांघते हुए लंका की ओर प्रस्थान किये । रस्ते में मुश्किले तो बहुत आई फिर भी वह सभी मुश्किलों का सामना करते हुए लंका पहुंचे और माता सीता को ढुनने में सफल हुए ।
वहां कथाकार के एक एक शब्द को मंत्रमुग्ध होकर सुन रहे पिंकू का मानो नया जन्म हो गया था । कुछ समय पहले तक जिस पिंकू की आखो से निराशा के भाब थे अब उसके आखो में चमक थी ।उसके शरीर में उत्शाह और स्फूर्ति का संचार होने लगा था ।
कथा ख़तम होने के साथ ही वह तेजी से घर की और चल पड़ा । उसे सफलता का मूलमंत्र मिल चूका था । वह मन ही मन सोच रहा था की जब हनुमान जी ने अपने बिश्वास से शक्ति अर्जित कर समुद्र को लांघ लिआ था तो पढाई कौन सी बड़ी बाधा है ।
उसी दिन से पिंकू ने मन बना लिया कि वह ध्यान लगा कर खूब अच्छे से पढ़ेगा और सफलता अबश्य प्राप्त करेगा ।
उसकी मेहनत रंग लायी । अपनी कक्षा में सबसे फिसड्डी (गधा ,फालतू ) रहने वाला छात्र पिंकु दसबी की Board परीक्षा में सबसे ज्यादा अब्बल (top) आया । इसके बाद पिंकू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और जिंदगी में हमेसा अब्बल आता रहा । वो लोग सेबा की परीक्षा में भी प्रथम स्थान पर आया और अपने आप पर बिश्वास के बदौलत वह सरकारी सेबा (Government Service ) में भी पदोन्नति पाते हुए ऊँचे औदे तक पहुँच गया ।
दोस्तों ,बिस्वास की शक्ति को साबित करने के लिए पिंकू का जीवन बस एक उदाहरण है ।
हर एक सफल ब्यक्तित्व के पीछे उस ब्यक्ति का बिस्वास और कुछ कर गुजरने का जज्वे का योगदान होता है ।
...........धन्यवाद.............




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